जाति

राग स्वरूप अपने विशेष प्रकार के आरोह-अवरोह के क्रम में रहता है। जिस राग में सातों स्वर सा रे ग म प ध नि हों उसे सम्पूर्ण-सम्पूर्ण जाति कहते हैं। इसी प्रकार 6 स्वरों के क्रम को षाढव। 5 स्वरों के क्रम को औढव और 4 स्वरों को सुरतर कहते हैं। ध्यान में रखें कि आरोह में जितने स्वर लगेंगे उससे कहीं अधिक या कम से कम आरोह के बराबर स्वर अवरोह में आने चाहिये। आरोह की अपेक्षा अवरोह में कम स्वर भारतीय संगीत में नहीं लिये जाते कारण वह नितान्त अस्वाभाविक बात है। इस प्रकार जातियों के कुल 10 प्रकार बनते हैं -

  • सम्पूर्ण - सम्पूर्ण
  • षाढव - सम्पूर्ण
  • षाढव - षाढव
  • औढव - सम्पूर्ण
  • औढव - षाढव
  • औढव - औढव
  • सुरतर - सम्पूर्ण
  • सुरतर - षाढव
  • सुरतर - औढव
  • सुरतर - सुरतर
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